इको: 2D, स्ट्रेन, 3D, TEE, स्ट्रेस और बच्चों का इको
दिल के हिस्से, वाल्व, पंपिंग ताकत और खून का बहाव दिखाने वाली दिल की सोनोग्राफी, जिसके ज़्यादा जानकारी, स्ट्रेस टेस्ट और बच्चों के लिए खास प्रकार होते हैं।
इको में क्या दिखता है
इको यानी दिल की सोनोग्राफी। इसमें आवाज़ की तरंगें इस्तेमाल होती हैं, एक्स-रे नहीं, इसलिए रेडिएशन का सवाल ही नहीं। दिल के हिस्से कितने बड़े हैं, पंपिंग कैसी है, वाल्व ठीक से खुलते-बंद होते हैं या नहीं, फेफड़ों का प्रेशर, दिल के आसपास पानी और दिल में छेद, यह सब दिखता है। सांस फूलना, सीने में दर्द, पैरों में सूजन, मर्मर, हाई बीपी और हार्ट फेल्योर के शक में इको आम तौर पर किया जाता है।
इको के प्रकार
2D इको और डॉप्लर
यह आम इको है। बाईं करवट लिटाकर, छाती पर जेल लगाकर प्रोब घुमाया जाता है। थोड़ा ही समय लगता है और कोई खास तैयारी नहीं चाहिए।
स्ट्रेन इमेजिंग
आम इको के साथ ही किया जाता है। यह नापता है कि दिल की मांसपेशी कितना खिंचती और सिकुड़ती है। आम पंपिंग कम होने से पहले ही मांसपेशी की शुरुआती कमज़ोरी इसमें पकड़ी जा सकती है, जैसे कैंसर के कुछ इलाज ले रहे मरीज़ों में।
3D इको
दिल की तीन आयाम वाली तस्वीर मिलती है। वाल्व और छेद का आकार ठीक से देखने में काम आता है, जैसे ASD डिवाइस क्लोज़र से पहले।
TEE
मुंह से एक पतला प्रोब खाने की नली में डाला जाता है। खाने की नली दिल के ठीक पीछे होती है, इसलिए वाल्व, थक्के और छेद ज़्यादा साफ दिखते हैं। पहले खाली पेट रहना होता है। गले में स्प्रे से सुन्न किया जाता है और नींद की दवा दी जाती है। गला सुन्न रहने तक कुछ न खाएं-पिएं, और घर जाते समय किसी को साथ रखें।
डोबुटामाइन स्ट्रेस इको
जो लोग ट्रेडमिल पर नहीं चल सकते, उनके लिए। ड्रिप से डोबुटामाइन नाम की दवा दी जाती है, जिससे दिल ज़्यादा काम करता है, और हर स्टेज पर इको की तस्वीरें ली जाती हैं। कोरोनरी बीमारी में दिल की मांसपेशी के किसी हिस्से को खून कम मिल रहा है या नहीं, यह इससे पता चलता है। टेस्ट से पहले कोई दवा रोकनी है या नहीं, डॉक्टर बताएंगे।
बच्चों का इको
बच्चों और नवजातों के लिए इको, खासकर जन्मजात दिल की बीमारी, जैसे दिल में छेद या PDA, देखने के लिए।
साथ क्या लाएं
पुरानी इको रिपोर्ट, ईसीजी और दवाओं की लिस्ट लाएं। स्ट्रेस टेस्ट के दौरान सीने में दर्द या सांस फूले तो तुरंत बताएं।
आपको कौन-सा इको चाहिए, यह जांच और आपकी तकलीफ सुनकर ही तय होता है। यह जानकारी सिर्फ समझने के लिए है, डॉक्टर से मिलने की जगह नहीं ले सकती।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
