एडवांस्ड कोरोनरी इमेजिंग: OCT, IVUS और FFR
एंजियोग्राफी के दौरान नस के अंदर से देखने या खून का बहाव नापने वाली जांचें, जिनसे तय होता है कि स्टेंट चाहिए या नहीं और वह ठीक से लगा है या नहीं।
सिर्फ एंजियोग्राफी काफी क्यों नहीं होती?
एंजियोग्राफी नस की एक परछाई जैसी तस्वीर है। इससे पता चलता है कि नस कितनी पतली दिख रही है, लेकिन हर बार यह नहीं पता चलता कि रुकावट असल में खून का बहाव कितना रोक रही है, या नस की दीवार अंदर से कैसी है। यह समझने के लिए तीन तरीके इस्तेमाल होते हैं। तीनों कैथ लैब में एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी के दौरान ही किए जाते हैं।
तीन तरीके, तीन काम
- FFR: एक बहुत पतला प्रेशर वायर रुकावट के पार ले जाया जाता है। रुकावट के पहले और बाद का प्रेशर नापकर पता चलता है कि यह रुकावट सच में खून रोक रही है या नहीं। इससे तय होता है कि स्टेंट चाहिए या दवा से काम चल जाएगा।
- IVUS: कैथेटर के सिरे पर छोटा-सा अल्ट्रासाउंड प्रोब होता है। इससे नस की दीवार अंदर से दिखती है, नस का असली साइज़ और कितना प्लाक जमा है, यह पता चलता है।
- OCT: इसमें आवाज़ की जगह रोशनी का इस्तेमाल होता है। नस की अंदरूनी परत और लगे हुए स्टेंट की बहुत बारीक तस्वीरें मिलती हैं।
आपको क्या महसूस हो सकता है
ज़्यादातर लोगों को आम एंजियोग्राफी से कुछ खास फर्क महसूस नहीं होता। FFR के समय दिल की छोटी नसों को खोलने के लिए एक दवा दी जा सकती है। इससे थोड़ी देर गर्मी लगना, सांस भारी लगना या सीने में जकड़न हो सकती है, जो जल्दी ठीक हो जाती है। OCT में तस्वीर लेते समय थोड़ी डाई डालकर नस से खून हटाया जाता है।
इससे क्या फायदा मिलता है
- जिस रुकावट से बहाव नहीं रुक रहा, वहां बेवजह स्टेंट लगाने से बचा जा सकता है।
- स्टेंट का सही साइज़ और लंबाई चुनी जा सकती है।
- स्टेंट पूरा खुला है और सही जगह बैठा है, यह जांचा जा सकता है। लेफ्ट मेन जैसी कॉम्प्लेक्स एंजियोप्लास्टी में यह और भी ज़रूरी है।
तैयारी और बाद की देखभाल
सब कुछ एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी जैसा ही है। अस्थमा, किडनी की बीमारी, डायबिटीज़ की दवा और एलर्जी के बारे में पहले ही बता दें। अगर एंजाइना की जांच चल रही है तो स्ट्रेस टेस्ट और पुरानी रिपोर्ट साथ लाएं।
इनमें से कौन-सी जांच चाहिए, यह प्रोसीजर के समय दिखी चीज़ों और आपकी रिपोर्ट देखकर ही तय होता है। यह जानकारी सिर्फ समझने के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
