पेसमेकर लगाना (सिंगल और ड्यूल चैंबर)
दिल की धड़कन बहुत धीमी न हो, इसके लिए कॉलरबोन के नीचे त्वचा के अंदर लगाया जाने वाला छोटा उपकरण, जिससे अक्सर चक्कर, बेहोशी और थकान में आराम मिलता है।
पेसमेकर क्या करता है?
पेसमेकर बैटरी से चलने वाला छोटा-सा उपकरण है, जो लगातार आपकी धड़कन पर नज़र रखता है। धड़कन बहुत धीमी हो जाए या बीच में रुक जाए, तो यह एक छोटा-सा करंट देता है और दिल धड़कता है। ज़्यादातर समय आपको इसका काम करना महसूस भी नहीं होता।
किसे इसकी ज़रूरत होती है
सबसे आम वजह है धीमी धड़कन या हार्ट ब्लॉक, जिससे चक्कर, बेहोशी, बहुत ज़्यादा थकान या सांस फूलना होता है। ईसीजी, होल्टर और आपके लक्षण देखकर फैसला होता है। कुछ दवाओं से भी धड़कन धीमी हो सकती है, इसलिए डॉक्टर पहले आपकी दवाएं देखते हैं।
सिंगल चैंबर या ड्यूल चैंबर?
- सिंगल चैंबर: एक तार, यानी लीड, जो आमतौर पर दिल के दाहिने निचले हिस्से में लगाई जाती है।
- ड्यूल चैंबर: दो लीड, एक ऊपर के हिस्से में और एक नीचे के हिस्से में, ताकि दोनों हिस्से कुदरती क्रम में काम करें।
आपकी धड़कन की परेशानी देखकर कार्डियोलॉजिस्ट टाइप चुनते हैं।
कैसे लगाया जाता है
- कॉलरबोन के नीचे की जगह, ज़्यादातर बाईं तरफ, लोकल एनेस्थीसिया से सुन्न की जाती है। ज़रूरत हो तो हल्की नींद की दवा दी जाती है।
- छोटा-सा चीरा लगाकर, एक्स-रे देखते हुए, नस के रास्ते लीड दिल तक पहुंचाई जाती है।
- लीड की जांच करके पेसमेकर से जोड़ा जाता है, और पेसमेकर को त्वचा के नीचे छोटी-सी जेब में रखा जाता है।
- टांके लगाकर ड्रेसिंग की जाती है।
पेसमेकर के साथ रोज़ की ज़िंदगी
- घाव भरने तक उसे साफ और सूखा रखें। शुरू के कुछ हफ्ते उस तरफ का हाथ कंधे से ऊपर न उठाएं और भारी वज़न न उठाएं, जैसा डॉक्टर बताएं।
- डिवाइस कार्ड हमेशा साथ रखें और एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी को दिखाएं।
- मोबाइल को डिवाइस से लगभग 15 सेंटीमीटर दूर रखें, उसके ऊपर वाली जेब में न रखें।
- MRI या किसी भी ऑपरेशन से पहले डॉक्टर को पेसमेकर के बारे में बताएं।
- नियमित चेकअप ज़रूरी है। कुछ साल बाद बैटरी कम होने पर पेसमेकर का डिब्बा एक छोटी प्रोसीजर से बदला जाता है।
तुरंत कब संपर्क करें
घाव लाल हो जाए, सूज जाए, गर्म लगे या उससे पानी निकले, बुखार आए, या फिर से चक्कर-बेहोशी होने लगे तो तुरंत संपर्क करें। बहुत तेज़ और खतरनाक धड़कन के लिए ICD नाम का अलग उपकरण होता है। दिल की पंपिंग देखने के लिए इको किया जाता है।
पेसमेकर चाहिए या नहीं और कौन-सा, यह जांच और रिपोर्ट देखकर ही तय होता है। यह जानकारी सिर्फ समझने के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
