कॉम्प्लेक्स कोरोनरी एंजियोप्लास्टी: CTO, लेफ्ट मेन और बाइफर्केशन
लंबे समय से पूरी बंद नस (CTO), लेफ्ट मेन नस की रुकावट या जहां नस दो हिस्सों में बंटती है वहां की रुकावट, ऐसे मुश्किल ब्लॉकेज के लिए सोच-समझकर की जाने वाली एंजियोप्लास्टी।
ब्लॉकेज "मुश्किल" कब कहलाता है?
कुछ रुकावटें सीधी-सादी छोटी रुकावट से ज़्यादा मुश्किल होती हैं। ऐसे तीन आम हालात हैं:
- CTO: नस लंबे समय से, आमतौर पर तीन महीने या उससे ज़्यादा, पूरी तरह बंद रहती है। ऐसे में शरीर खुद छोटे-छोटे रास्ते बना लेता है, जिन्हें कोलैटरल कहते हैं, और उनसे थोड़ा खून आगे जाता रहता है।
- लेफ्ट मेन: यह छोटी लेकिन मुख्य नस है जो दिल के बड़े हिस्से को खून देती है। यहां रुकावट हो तो खास सावधानी चाहिए।
- बाइफर्केशन: जहां नस दो हिस्सों में बंटती है, ठीक वहीं रुकावट। मुख्य नस और शाखा, दोनों को बचाना होता है। एक या दो स्टेंट लग सकते हैं।
क्या हर बार एंजियोप्लास्टी ही करनी है?
नहीं। लेफ्ट मेन या कई नसों में रुकावट हो तो एंजियोप्लास्टी, बायपास सर्जरी और दवा, ये सभी विकल्प होते हैं। कार्डियोलॉजिस्ट और हार्ट सर्जन मिलकर, आपसे बात करके फैसला करते हैं। आपके लक्षण, डायबिटीज़, दिल की पंपिंग ताकत और आपकी पसंद, सब देखा जाता है। CTO खोलने के बारे में आमतौर पर तब सोचा जाता है जब दवा के बाद भी तकलीफ बनी रहे, या जांच में दिखे कि आगे की मांसपेशी ज़िंदा है लेकिन उसे खून कम मिल रहा है।
आम एंजियोप्लास्टी से क्या अलग है
बुनियादी तरीका आम एंजियोप्लास्टी जैसा ही है, लोकल एनेस्थीसिया देकर और आप होश में रहते हैं। लेकिन समय ज़्यादा लग सकता है, कभी दोनों कलाइयों से या कलाई और जांघ दोनों से करना पड़ता है, और खास वायर व बैलून लगते हैं। स्टेंट का साइज़ चुनने और यह देखने के लिए कि स्टेंट ठीक से खुला है, अक्सर IVUS या OCT का इस्तेमाल होता है।
पहले की तैयारी
- डाई ज़्यादा लग सकती है, इसलिए किडनी की जांच पहले होती है।
- सारी रिपोर्ट, पिछली एंजियोग्राफी की CD और दवाओं की लिस्ट लाएं।
- आपके मामले में फायदा क्या है और खतरा क्या, डॉक्टर से अच्छी तरह समझ लें।
बाद में
ठीक होना लगभग आम एंजियोप्लास्टी जैसा ही होता है। एंटीप्लेटलेट दवा बहुत ज़रूरी है, कार्डियोलॉजिस्ट से पूछे बिना इसे बंद न करें। कोरोनरी बीमारी को काबू में रखने के लिए लाइफस्टाइल और नियमित फॉलो-अप भी उतना ही ज़रूरी है।
तुरंत कब संपर्क करें
सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर या पंचर वाली जगह से खून आए तो तुरंत अस्पताल आएं।
यह तरीका आपके लिए सही है या नहीं, यह जांच और रिपोर्ट ध्यान से देखकर ही तय हो सकता है। यह जानकारी सिर्फ समझने के लिए है, डॉक्टर से मिलने की जगह नहीं ले सकती।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
