कोरोनरी आर्टरी डिजीज और एंजाइना (सीने में दर्द)
जब दिल को खून पहुँचाने वाली नसों में चर्बी जमकर वे सिकुड़ जाती हैं, तो मेहनत या तनाव में सीने में दर्द या दबाव होता है, जिसे एंजाइना कहते हैं।
दिल की नसों में असल में क्या होता है?
दिल लगातार धड़कता है और उसे खुद भी खून चाहिए होता है। यह खून कोरोनरी आर्टरी नाम की नसों से मिलता है। सालों तक इन नसों की अंदरूनी दीवार पर कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम जमा होता रहता है, जिसे आम भाषा में ब्लॉकेज कहते हैं। आराम के समय सिकुड़ी नस से भी काम चल जाता है, लेकिन तेज़ चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने या तनाव में दिल को ज़्यादा ऑक्सीजन चाहिए होती है। तब पूरा खून नहीं पहुँच पाता और सीने में दबाव, भारीपन या जकड़न महसूस होती है। इसी को एंजाइना कहते हैं। आमतौर पर रुककर आराम करने से यह कम हो जाता है।
अगर दर्द हमेशा लगभग एक जैसी मेहनत पर ही आता है, तो उसे स्टेबल एंजाइना कहते हैं। लेकिन दर्द नया हो, बढ़ता जा रहा हो या आराम में भी आए, तो यह अनस्टेबल एंजाइना हो सकता है। यह खतरे का संकेत है, तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।
किसे ज़्यादा खतरा होता है?
- डायबिटीज, हाई BP या ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल वाले लोग
- सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या तंबाकू लेने वाले
- परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी होना
- कसरत की कमी और पेट के आसपास बढ़ा हुआ वज़न
- बढ़ती उम्र और लंबे समय का तनाव
कौन सी जाँचें होती हैं?
शुरुआत में ECG, खून की जाँच (शुगर, कोलेस्ट्रॉल, किडनी), इको और TMT यानी ट्रेडमिल पर चलाकर की जाने वाली जाँच होती है। इनमें ब्लॉकेज का शक हो तो एंजियोग्राफी से पता चलता है कि ब्लॉकेज ठीक कहाँ और कितना है। ज़रूरत पड़ने पर OCT, IVUS या FFR से तय किया जाता है कि उस ब्लॉकेज का इलाज ज़रूरी है या नहीं।
इलाज के रास्ते
ज़्यादातर मरीज़ों में शुरुआत जीवनशैली में बदलाव और दवाइयों से होती है। खून पतला रखने की दवा, कोलेस्ट्रॉल की दवा और दिल का काम हल्का करने वाली दवाइयाँ दी जाती हैं। कुछ लोगों को एंजियोप्लास्टी करके स्टेंट डालना पड़ता है। मुश्किल या जटिल ब्लॉकेज में कॉम्प्लेक्स एंजियोप्लास्टी की ज़रूरत पड़ सकती है, और कुछ मरीज़ों के लिए बायपास सर्जरी भी एक विकल्प होती है। कौन सा इलाज सही रहेगा, यह ब्लॉकेज की संख्या, उसकी जगह, आपकी तकलीफ और पूरी सेहत देखकर तय होता है।
तुरंत अस्पताल कब जाएँ?
सीने का दर्द कुछ मिनट से ज़्यादा रहे, आराम से कम न हो, या साथ में पसीना, सांस फूलना या उल्टी हो, तो यह हार्ट अटैक हो सकता है। इंतज़ार न करें, तुरंत 108 पर कॉल करें। इमरजेंसी में क्या करें, यह भी पहले से पढ़ लें।
सही निदान और इलाज डॉक्टर की जाँच के बाद ही तय होता है। यह जानकारी सिर्फ़ बीमारी को समझने के लिए है।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
