डॉ. अमोल एच. पाटिल

इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट

MBBS, MD, DM (Cardiology) · रजि. नं. 2013/06/2247

डॉ. अमोल एच. पाटिलइंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट

बीमारियाँ

हार्ट अटैक (दिल का दौरा)

दिल की नस अचानक बंद होकर मांसपेशी का खून रोक दे, तो हार्ट अटैक होता है; तुरंत 108 पर कॉल करके जल्दी अस्पताल पहुँचने से नुकसान घट सकता है।

डॉ. अमोल एच. पाटिल · MBBS, MD, DM (Cardiology)·अपडेट 21 अक्टूबर 2026

इन चेतावनी संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ न करें

हार्ट अटैक अक्सर तब होता है जब दिल की नस में जमा प्लाक अचानक फट जाता है और उस पर खून का थक्का बन जाता है। नस एकदम बंद हो जाती है। उस नस पर निर्भर दिल के हिस्से तक खून नहीं पहुँचता और मांसपेशी को नुकसान होने लगता है। नस जितनी देर बंद रहेगी, नुकसान उतना बढ़ेगा। इसलिए हार्ट अटैक में हर मिनट कीमती है।

  • सीने में दर्द, दबाव, भारीपन या जकड़न जो कुछ मिनट से ज़्यादा रहे या जाकर फिर लौट आए
  • दर्द का बांह, बाएँ कंधे, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैलना
  • सांस फूलना, ठंडा पसीना, जी मिचलाना या चक्कर आना

महिलाओं, बुज़ुर्गों और डायबिटीज़ वाले लोगों में लक्षण अलग हो सकते हैं। कभी सिर्फ़ सांस फूलती है, बहुत थकान लगती है या पेट के ऊपरी हिस्से में बेचैनी होती है, और सीने में ज़्यादा दर्द नहीं होता।

अभी तुरंत क्या करें?

  1. तुरंत 108 एम्बुलेंस (या 112) पर कॉल करें। "थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा" सोचकर समय न गँवाएँ।
  2. खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल न जाएँ।
  3. बैठ जाएँ, शांत रहने की कोशिश करें, तंग कपड़े ढीले कर दें।
  4. एस्पिरिन तभी चबाएँ जब डॉक्टर या 108 पर बात करने वाला व्यक्ति कहे और आपको उससे एलर्जी न हो।
  5. ऐसे अस्पताल जाएँ जहाँ इमरजेंसी में एंजियोप्लास्टी हो सकती हो, ताकि बंद नस जल्दी खोली जा सके।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक नहीं हैं

हार्ट अटैक में मरीज़ आमतौर पर होश में रहता है, बात करता है, पर तकलीफ में होता है। कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक ठीक से पंप करना बंद कर देता है। व्यक्ति गिर पड़ता है, आवाज़ देने पर जवाब नहीं देता और सामान्य तरीके से सांस नहीं लेता। ऐसे में ज़ोर से मदद बुलाएँ, 108 पर कॉल करें और मदद आने तक CPR करते रहें, यानी सीने के बीचों-बीच ज़ोर से और तेज़ी से दबाते रहें। आगे के कदम इमरजेंसी पेज पर दिए हैं।

अस्पताल में और उसके बाद

ECG और ट्रोपोनिन जैसी खून की जाँच से हार्ट अटैक की पुष्टि होती है। आमतौर पर एंजियोग्राफी से बंद नस ढूँढकर एंजियोप्लास्टी और स्टेंट से उसे खोला जाता है। अगर कैथ लैब तक समय पर न पहुँच सकें, तो थक्का घोलने वाली दवा दी जा सकती है। दिल कितनी अच्छी तरह पंप कर रहा है, यह इको से देखा जाता है।

इसके खतरे वही हैं जो कोरोनरी आर्टरी डिजीज के हैं: डायबिटीज़, हाई BP, कोलेस्ट्रॉल, तंबाकू, परिवार में दिल की बीमारी और कसरत की कमी। अटैक के बाद दवाइयाँ नियमित लेना, तंबाकू पूरी तरह छोड़ना, शुगर, BP और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखना और कार्डियक रिहैब करना दोबारा अटैक का खतरा घटाने में मदद करता है।

सही निदान और इलाज डॉक्टर की जाँच के बाद ही तय होता है। यह पेज समझने के लिए है; इमरजेंसी में सबसे पहले 108 पर कॉल करें।

यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।

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