हार्ट फेलियर (दिल की पंपिंग कमज़ोर होना)
हार्ट फेलियर का मतलब दिल का रुकना नहीं, बल्कि शरीर की ज़रूरत जितना पंप न कर पाना है, जिससे सांस फूलती है, पैरों में सूजन और थकान होती है।
घबराएँ नहीं, दिल रुका नहीं है
नाम सुनकर डर लगता है, लेकिन हार्ट फेलियर का मतलब यह नहीं कि दिल रुक गया है या रुकने वाला है। इसका मतलब है कि दिल का पंप कमज़ोर या सख़्त हो गया है। खून आगे ठीक से नहीं धकेला जाता और फेफड़ों व शरीर में पीछे जमा होने लगता है। इससे पानी भरता है, सांस फूलती है और सूजन आती है। ऊपर से किडनी नमक और पानी रोककर रखती है, जिससे सूजन और बढ़ सकती है।
डॉक्टर अक्सर EF (इजेक्शन फ्रैक्शन) की बात करते हैं, यानी हर धड़कन में दिल का मुख्य चैंबर कितने प्रतिशत खून बाहर भेजता है। यह इको में नापा जाता है। कुछ लोगों में EF कम होता है, और कुछ में EF ठीक होता है पर दिल सख़्त होने से ठीक से भर नहीं पाता।
दिल कमज़ोर किन वजहों से होता है?
- पहले आया हार्ट अटैक या नसों में ब्लॉकेज
- सालों से बढ़ा हुआ BP
- डायबिटीज़
- दिल के वाल्व की बीमारी
- दिल की मांसपेशी की बीमारी (कार्डियोमायोपैथी), कभी शराब या इन्फेक्शन से
- लंबे समय तक धड़कन का बहुत तेज़ या अनियमित रहना
पहचान कैसे होती है?
सबसे अहम जाँच इको है। साथ में ECG, छाती का एक्स-रे और खून की जाँचें जैसे NT-proBNP, किडनी, सोडियम-पोटैशियम, हीमोग्लोबिन और थायरॉइड की जाती हैं। ब्लॉकेज का शक हो तो एंजियोग्राफी की सलाह दी जा सकती है।
रोज़मर्रा में क्या ध्यान रखें?
- दवाइयाँ नियमित लें। आजकल की कई दवाइयाँ तकलीफ कम करती हैं और लंबी ज़िंदगी में भी मदद कर सकती हैं। पेशाब की दवा से सूजन उतरती है।
- नमक कम खाएँ और पानी उतना ही पिएँ जितना डॉक्टर बताएँ।
- रोज़ सुबह वज़न लें। दो-तीन दिन में करीब 2 किलो वज़न बढ़े, या डॉक्टर की बताई सीमा से ज़्यादा बढ़े, तो तुरंत बताएँ।
- डॉक्टर जितना कहें उतना चलते-फिरते रहें और उनकी बताई वैक्सीन लगवाएँ।
असली वजह का इलाज भी ज़रूरी है, जैसे ब्लॉकेज खोलना या BP कंट्रोल करना। बहुत कम EF वाले कुछ मरीज़ों में खतरनाक धड़कन का जोखिम होता है, उन्हें ICD की सलाह दी जा सकती है। कुछ को CRT नाम के खास पेसमेकर से फायदा होता है।
तुरंत अस्पताल कब जाएँ?
आराम में भी बहुत सांस फूलना, लेट ही न पाना, झागदार या गुलाबी बलगम, सीने में दर्द या बेहोशी, इनमें तुरंत इलाज चाहिए। 108 पर कॉल करें और इमरजेंसी पेज देखें।
सही निदान और इलाज डॉक्टर की जाँच के बाद ही तय होता है। यह जानकारी बीमारी को समझने के लिए है।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
