पैरों की नसों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी
चलने पर पैर में दर्द, न भरने वाले घाव या ठंडे पैर के पीछे की सिकुड़ी या बंद नसों को देखने और खोलने की प्रोसीजर।
जब पैरों को खून कम मिलता है
जैसे दिल की नसों में चर्बी जमती है, वैसे ही पैरों की नसों में भी जम सकती है। इसे पेरिफेरल आर्टरी डिज़ीज़ कहते हैं। सिगरेट-तंबाकू, डायबिटीज़, बीपी और कोलेस्ट्रॉल वालों में यह ज़्यादा देखा जाता है।
इन लक्षणों पर ध्यान दें
- थोड़ा चलते ही पिंडली, जांघ या कूल्हे में ऐंठन जैसा दर्द, जो रुकने पर ठीक हो जाता है।
- आराम करते समय भी पैर में दर्द, खासकर रात में।
- पैर या उंगली का घाव जो भरता नहीं, या त्वचा का काला पड़ना।
- एक पैर दूसरे से ज़्यादा ठंडा या पीला लगना।
जांच से इलाज तक
पहले आसान जांचें होती हैं। टखने और बांह का बीपी नापकर तुलना की जाती है, जिसे ABI कहते हैं, और साथ में डॉप्लर सोनोग्राफी होती है। फिर ज़रूरत हो तो पैरों की एंजियोग्राफी की जाती है, जो दिल की एंजियोग्राफी जैसी ही है, डाई डालकर एक्स-रे पर नसें देखी जाती हैं। सही तरह की रुकावट मिले तो अक्सर उसी समय एंजियोप्लास्टी हो जाती है। बैलून से नस खोली जाती है और ज़रूरत हो तो स्टेंट लगाया जाता है। बहुत लंबी या मुश्किल रुकावट में बायपास सर्जरी बेहतर रहती है। हल्की तकलीफ में दवा और रोज़ चलना ही काफी हो सकता है।
प्रोसीजर कैसे होती है
- आमतौर पर जांघ में लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है। आप होश में रहते हैं।
- कैथेटर पैरों की नसों तक ले जाकर डाई डाली जाती है।
- ज़रूरत हो तो वायर रुकावट के पार ले जाकर बैलून फुलाया जाता है और स्टेंट लगाया जाता है।
- कैथेटर निकालकर पंचर की जगह पर दबाव दिया जाता है।
पहले और बाद में
किडनी की बीमारी, मेटफॉर्मिन या डायबिटीज़ की दूसरी दवा, खून पतला करने की दवा और एलर्जी के बारे में पहले बताएं। बाद में एंटीप्लेटलेट और कोलेस्ट्रॉल की दवा ज़्यादातर लंबे समय तक लेनी पड़ती है। रोज़ चलना, तंबाकू छोड़ना, शुगर कंट्रोल रखना और रोज़ पैरों को देखना, यह सब प्रोसीजर जितना ही ज़रूरी है। पैरों की नसों में रुकावट हो तो अक्सर दिल की नसों में भी होती है, इसलिए दिल की जांच की सलाह भी दी जा सकती है।
तुरंत कब आएं
पैर में अचानक तेज़ दर्द हो, पैर ठंडा, पीला या सुन्न पड़ जाए, या जांघ में सूजन या खून आए तो तुरंत अस्पताल आएं।
पैरों के लिए सही इलाज जांच और रिपोर्ट देखकर ही तय होता है। यह जानकारी सिर्फ समझने के लिए है, डॉक्टर से मिलने की जगह नहीं ले सकती।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
