पैरों की नसों में ब्लॉकेज (PAD)
पैरों की नसों में ब्लॉकेज से चलते समय पिंडली दर्द, ठंडे पैर और देर से भरते घाव होते हैं, और बीमारी बढ़ने पर पैर को खतरा हो सकता है।
वही ब्लॉकेज, अब पैरों में
जो प्लाक दिल की नसों को बंद करता है, वही पैरों की नसों में भी जम सकता है। चलते समय पैर की मांसपेशियों को ज़्यादा खून चाहिए होता है, पर सिकुड़ी नस उतना नहीं दे पाती, तो पिंडली या जांघ में ऐंठन होने लगती है। कुछ मिनट रुकने पर आराम मिल जाता है। इसे क्लॉडिकेशन कहते हैं। ब्लॉकेज बढ़ने पर आराम में भी, खासकर रात को, दर्द होने लगता है और पैर के घाव भरना बंद कर देते हैं। इस गंभीर चरण को क्रिटिकल लिंब इस्कीमिया कहते हैं, जिसमें पैर को खतरा होता है।
PAD वाले लोगों में अक्सर शरीर की दूसरी नसें भी सिकुड़ी होती हैं, इसलिए यह हार्ट अटैक और लकवे का भी चेतावनी संकेत है। PAD हो तो अपने डॉक्टर से दिल की नसों की जाँच के बारे में पूछें।
किसे ज़्यादा खतरा है?
- सिगरेट, बीड़ी या तंबाकू, यह सबसे बड़ी वजह है
- डायबिटीज़
- हाई BP और ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल
- 50 से ज़्यादा उम्र और किडनी की बीमारी
जाँचें
डॉक्टर पैरों की नब्ज़ देखते हैं और ABI जाँच कर सकते हैं, जिसमें टखने और बांह का BP मिलाकर देखा जाता है। पैरों की नसों की डॉप्लर सोनोग्राफी से पता चलता है कि खून कहाँ कम जा रहा है। इलाज से पहले CT एंजियोग्राफी या कैथेटर एंजियोग्राफी से ब्लॉकेज का पूरा नक्शा बनता है। साथ में शुगर, कोलेस्ट्रॉल और किडनी की जाँच भी होती है।
इलाज
तंबाकू पूरी तरह छोड़ना, नियमित पैदल चलने का अभ्यास और दवाइयाँ (खून पतला करने की दवा, कोलेस्ट्रॉल की दवा, BP और शुगर का अच्छा कंट्रोल) इलाज की नींव हैं। पैरों की रोज़ देखभाल ज़रूरी है, खासकर डायबिटीज़ में: रोज़ पैर देखें, सही जूते-चप्पल पहनें और छोटे घाव को भी नज़रअंदाज़ न करें। अगर दर्द से रोज़ का काम रुक रहा हो या पैर को खतरा हो, तो पेरिफेरल एंजियोप्लास्टी से बलून और कभी स्टेंट डालकर नस खोली जा सकती है। कुछ मरीज़ों को बायपास सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है।
तुरंत कब दिखाएँ?
अगर पैर अचानक ठंडा, सफ़ेद, बहुत दर्द वाला या सुन्न हो जाए, तो यह अचानक ब्लॉकेज हो सकता है। उंगली काली पड़ने लगे या पैर के घाव में इन्फेक्शन हो, तब भी तुरंत दिखाएँ। पैर में अचानक खून रुकना इमरजेंसी है; इमरजेंसी पेज देखें।
सही निदान और इलाज डॉक्टर की जाँच के बाद ही तय होता है। यह जानकारी बीमारी को समझने के लिए है।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
