धीमी धड़कन और हार्ट ब्लॉक
दिल के बिजली के सिग्नल धीमे बनें या रास्ते में अटकें, तो धड़कन धीमी हो जाती है; इससे थकान, चक्कर या बेहोशी हो सकती है और कभी पेसमेकर लगता है।
दिल की अपनी बिजली की वायरिंग
दिल की हर धड़कन एक कुदरती पेसमेकर से शुरू होती है, जिसे साइनस नोड कहते हैं। यह ऊपर के दाएँ चैंबर में होता है। वहाँ से सिग्नल AV नोड नाम के जंक्शन से होकर नीचे के चैंबर तक जाता है, जो खून पंप करते हैं। अगर साइनस नोड ही धीमा चले या रुक-रुक कर चले (सिक साइनस सिंड्रोम), या सिग्नल नीचे जाते हुए देर से पहुँचे या अटक जाए (हार्ट ब्लॉक), तो धड़कन धीमी हो जाती है। तब दिमाग और मांसपेशियों को पूरा खून नहीं मिलता।
धीमी नब्ज़ हमेशा परेशानी नहीं होती। कसरत करने वाले जवान लोगों और खिलाड़ियों की नब्ज़ आराम में 50 के आसपास हो सकती है, और नींद में धड़कन कम होना भी सामान्य है। चिंता तब है जब तकलीफ हो या ब्लॉक ज़्यादा हो।
हार्ट ब्लॉक के प्रकार
- फर्स्ट डिग्री: सिग्नल देर से पहुँचते हैं, पर सब पहुँचते हैं। अक्सर सिर्फ़ निगरानी रखी जाती है।
- सेकंड डिग्री: कुछ धड़कनें छूट जाती हैं। एक प्रकार आमतौर पर हल्का होता है, दूसरे (मोबिट्ज़ II) में अक्सर पेसमेकर लगता है।
- थर्ड डिग्री (कम्प्लीट): कोई सिग्नल नीचे नहीं पहुँचता और नीचे के चैंबर अपने आप बहुत धीरे धड़कते हैं। इसमें आमतौर पर पेसमेकर लगता है।
यह किन वजहों से होता है?
उम्र के साथ दिल की वायरिंग का घिसना आम वजह है। इसके अलावा हार्ट अटैक, कुछ दवाइयाँ (बीटा ब्लॉकर, BP और धड़कन की कुछ दवाइयाँ, डिगॉक्सिन), थायरॉइड कम होना, पोटैशियम बढ़ना, कुछ इन्फेक्शन और दिल का ऑपरेशन भी वजह हो सकते हैं। डॉक्टर पहले ठीक हो सकने वाली वजहें जाँचते हैं।
कौन सी जाँचें मदद करती हैं?
ECG, धीमी धड़कन के दौर पकड़ने के लिए 24 से 48 घंटे का होल्टर, इको, थायरॉइड और पोटैशियम की खून की जाँच, और कभी TMT ताकि देखा जा सके कि कसरत में धड़कन ठीक से बढ़ती है या नहीं।
इलाज
अगर किसी दवा से धड़कन धीमी हुई है, तो डॉक्टर उसे बदल या बंद कर सकते हैं। तकलीफ बनी रहे या ब्लॉक ज़्यादा हो, तो स्थायी पेसमेकर इसका सामान्य इलाज है। यह छोटा सा उपकरण कॉलरबोन के नीचे त्वचा के अंदर लगाया जाता है और इसकी एक तार दिल तक जाती है। जब दिल की अपनी धड़कन बहुत धीमी हो, तो यह धड़कन देता है।
कब तुरंत दिखाएँ?
बेहोशी, बहुत धीमी नब्ज़ के साथ सीने में दर्द या सांस फूलना, या अचानक उलझन हो, तो तुरंत इलाज ज़रूरी है। 108 पर कॉल करें और इमरजेंसी पेज देखें।
सही निदान और इलाज डॉक्टर की जाँच के बाद ही तय होता है। यह जानकारी बीमारी को समझने के लिए है।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
