ICD लगाना
ICD त्वचा के नीचे लगने वाला उपकरण है, जो दिल की खतरनाक तेज़ धड़कन को पहचानकर तेज़ पेसिंग या शॉक से उसे फिर से सामान्य करता है।
ICD क्या है?
ICD दिखने में पेसमेकर जैसा होता है और लगाया भी वैसे ही जाता है, लेकिन यह एक ज़्यादा काम करता है। दिल के निचले हिस्सों से आने वाली बहुत तेज़ और खतरनाक धड़कन, जैसे VT या VF, पर यह लगातार नज़र रखता है। ऐसी धड़कन से अचानक दिल रुक सकता है। ऐसी धड़कन पकड़ में आते ही ICD पहले तेज़ पेसिंग करता है, जो शायद आपको महसूस भी न हो। उससे बात न बने तो शॉक देकर धड़कन सामान्य करता है। धड़कन बहुत धीमी हो जाए तो पेसमेकर का काम भी करता है।
किसे ICD की सलाह दी जाती है?
- जिनका दिल पहले रुक चुका है और वे बच गए, या जिन्हें खतरनाक तेज़ धड़कन हो चुकी है।
- जिनकी दिल की मांसपेशी कमज़ोर है, यानी हार्ट फेल्योर, और सही दवा के बाद भी पंपिंग कम रहती है, ऐसे कुछ लोग।
- खानदानी दिल की कुछ बीमारियां, जिनमें ऐसी धड़कन का खतरा ज़्यादा होता है।
यह फैसला लेने से पहले आमतौर पर इको से पंपिंग नापी जाती है।
प्रोसीजर कैसे होती है
सब कुछ पेसमेकर जैसा ही है। लोकल एनेस्थीसिया, ज़रूरत हो तो हल्की नींद की दवा, कॉलरबोन के नीचे छोटा चीरा, नस से लीड दिल तक और डिवाइस त्वचा के नीचे जेब में। घर भेजने से पहले डिवाइस की जांच की जाती है।
शॉक कैसा लगता है, और तब क्या करें
ज़्यादातर लोग बताते हैं कि सीने में अचानक ज़ोर का धक्का या लात लगने जैसा लगता है। यह पल भर में खत्म हो जाता है।
- एक ही शॉक लगा और बाद में ठीक लग रहा है: बैठ जाएं, आराम करें और डॉक्टर के बताए अनुसार जल्दी क्लिनिक को खबर करें।
- थोड़ी देर में एक से ज़्यादा शॉक लगें, या तबीयत ठीक न लगे, सीने में दर्द हो, सांस फूले: तुरंत इमरजेंसी में जाएं। इमरजेंसी के लक्षण देखें।
रोज़ की देखभाल
घाव की देखभाल, हाथ की हरकत, मोबाइल दूर रखना और एयरपोर्ट पर कार्ड दिखाना, सब पेसमेकर जैसा ही है। नियमित डिवाइस चेकअप बहुत ज़रूरी है। ICD लगने या शॉक लगने के बाद गाड़ी कब चलानी है, इसके नियम अलग-अलग होते हैं, इसलिए पहले डॉक्टर से पूछें। दिल की दवाएं चालू रखें। ICD खतरनाक धड़कन रोकता है, दवा की जगह नहीं लेता।
ICD आपके लिए सही है या नहीं, यह जांच और रिपोर्ट देखकर ही तय होता है। यह जानकारी सिर्फ समझने के लिए है, डॉक्टर से मिलने की जगह नहीं ले सकती।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
