डॉ. अमोल एच. पाटिल

इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट

MBBS, MD, DM (Cardiology) · रजि. नं. 2013/06/2247

डॉ. अमोल एच. पाटिलइंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट

बीमारियाँ

धड़कन तेज़ होना और अनियमित धड़कन

धड़कन तेज़, ज़ोरदार या अनियमित महसूस होने को पैल्पिटेशन कहते हैं; अक्सर यह मामूली होता है, पर कभी AF जैसी गड़बड़ी का इलाज ज़रूरी होता है।

डॉ. अमोल एच. पाटिल · MBBS, MD, DM (Cardiology)·अपडेट 21 अक्टूबर 2026

अपनी धड़कन महसूस होना

आमतौर पर हमें अपनी धड़कन का पता नहीं चलता। जब अचानक धड़कन तेज़ दौड़ती, ज़ोर से धड़कती, फड़फड़ाती या छूटती हुई महसूस हो, तो उसे पैल्पिटेशन कहते हैं। आराम में एक बड़े व्यक्ति का दिल आमतौर पर मिनट में 60 से 100 बार, एक लय में धड़कता है। यह बिजली के सिग्नल से चलता है। सिग्नल गलत जगह से शुरू हो या घेरे में घूमने लगे, तो लय बिगड़ जाती है। इसे एरिदमिया कहते हैं।

धड़कन की आम गड़बड़ियाँ

  • एक्स्ट्रा धड़कन (एक्टोपिक): धड़कन छूटने या उछलने जैसा लगना। यह बहुत आम है और अक्सर मामूली होता है।
  • SVT: अचानक बहुत तेज़ पर एक लय वाली धड़कन, जो अचानक शुरू और अचानक बंद होती है।
  • AF (एट्रियल फिब्रिलेशन): अनियमित और अक्सर तेज़ धड़कन। इसमें दिल के अंदर थक्का बनकर लकवे का खतरा बढ़ता है।
  • वेंट्रिकुलर एरिदमिया: नीचे के चैंबर से आने वाली धड़कन, जो खासकर कमज़ोर दिल में गंभीर हो सकती है।

धड़कन किन वजहों से बढ़ती है?

चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक, शराब, सिगरेट, नींद की कमी, तनाव और घबराहट, बुखार, खून की कमी, थायरॉइड का बढ़ना और सर्दी-खांसी की कुछ दवाइयाँ धड़कन बढ़ा सकती हैं। पहले आया हार्ट अटैक, वाल्व की बीमारी, हाई BP या हार्ट फेलियर हो तो गंभीर धड़कन का खतरा ज़्यादा रहता है।

धड़कन को पकड़ना

सबसे काम की जाँच है धड़कन तेज़ होने के समय लिया गया ECG, इसलिए हो सके तो उसी समय ECG करवाएँ। स्मार्टवॉच में ECG रिकॉर्डिंग हो तो डॉक्टर को दिखाएँ। आती-जाती धड़कन पकड़ने के लिए 24 घंटे या उससे ज़्यादा का होल्टर या इवेंट रिकॉर्डर लगाया जाता है। दिल की बनावट देखने के लिए इको और थायरॉइड, हीमोग्लोबिन व नमक-खनिज की खून की जाँच होती है। कुछ मरीज़ों को EP स्टडी के लिए भेजा जाता है।

इलाज धड़कन के प्रकार पर निर्भर है

मामूली एक्स्ट्रा धड़कनों में अक्सर सिर्फ़ तसल्ली और वजहें कम करना काफ़ी होता है। दवाइयाँ धड़कन की रफ़्तार कम कर सकती हैं या लय ठीक रख सकती हैं। AF में लकवे का खतरा कम करने के लिए अक्सर खून पतला करने की दवा लगती है। कुछ धड़कनों का इलाज एब्लेशन नाम की कैथेटर प्रक्रिया से होता है। जिन्हें जानलेवा धड़कन का खतरा हो, उन्हें ICD की सलाह दी जा सकती है।

इमरजेंसी में कब जाएँ?

अगर धड़कन के साथ बेहोशी, सीने में दर्द या बहुत सांस फूले, या तेज़ धड़कन रुकने का नाम न ले, तो 108 पर कॉल करें और इमरजेंसी पेज देखें।

सही निदान और इलाज डॉक्टर की जाँच के बाद ही तय होता है। यह जानकारी धड़कन की तकलीफ समझने के लिए है।

यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।

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