ASD डिवाइस क्लोज़र
दिल के ऊपर के दो हिस्सों के बीच के छेद को, बिना ओपन सर्जरी के, जांघ की नस से दोहरी डिस्क वाला डिवाइस ले जाकर बंद करने की प्रोसीजर।
ASD क्या है?
दिल के चार हिस्से होते हैं। ऊपर के दो हिस्सों के बीच की दीवार में छेद हो तो उसे ASD कहते हैं। यह दिल में छेद का एक प्रकार है। इस छेद से ज़्यादा खून दाहिनी तरफ और फेफड़ों की ओर जाता है। बहुत लोगों को सालों तक कोई तकलीफ नहीं होती। डॉक्टर को धड़कन में मर्मर सुनाई दे या किसी और वजह से इको हो, तब पता चलता है।
धीरे-धीरे दिख सकने वाले लक्षण
- काम करते समय सांस फूलना, जल्दी थकान।
- धड़कन तेज़ होना या अनियमित धड़कन, बड़ी उम्र में ज़्यादा।
- बच्चों में बार-बार छाती का इन्फेक्शन या वज़न धीरे बढ़ना।
क्या हर छेद डिवाइस से बंद हो जाता है?
नहीं। छेद की वजह से दिल का दाहिना हिस्सा बड़ा हो रहा हो, तब बंद करने की सलाह दी जाती है। आम तौर पर मिलने वाला "सेकंडम" प्रकार हो और छेद के चारों ओर डिवाइस टिकाने लायक किनारा हो, तो डिवाइस से बंद हो सकता है। दूसरे प्रकार या बहुत बड़े छेद में ज़्यादातर सर्जरी करनी पड़ती है। छेद नापने और फैसला लेने के लिए इको किया जाता है, ज़रूरत हो तो TEE या 3D इको।
छेद कैसे बंद किया जाता है
- उम्र और प्लान के हिसाब से नींद की दवा या पूरा एनेस्थीसिया दिया जाता है। बच्चों को ज़्यादातर पूरा एनेस्थीसिया चाहिए होता है।
- जांघ की नस से कैथेटर दिल तक ले जाया जाता है।
- इको और एक्स-रे देखते हुए, मुड़ा हुआ दोहरी डिस्क वाला डिवाइस छेद से आगे बढ़ाया जाता है। छेद के दोनों तरफ एक-एक डिस्क खुलती है और बटन की तरह छेद बंद हो जाता है।
- डिवाइस ठीक बैठा है, यह पक्का करके ही उसे छोड़ा जाता है। अगले कुछ महीनों में शरीर की अपनी परत उस पर चढ़ जाती है।
पहले और बाद में
एलर्जी, खासकर निकल जैसी धातु से, खून बहने की परेशानी और सारी दवाओं के बारे में डॉक्टर को बताएं। बाद में कुछ दिन अस्पताल में रहना पड़ता है। कुछ महीने एंटीप्लेटलेट दवा दी जाती है, जितने दिन डॉक्टर कहें उतने दिन लें। डॉक्टर जितने दिन कहें, भारी काम और ज़ोर की कसरत से बचें, और इको के लिए समय पर फॉलो-अप पर आएं।
तुरंत कब संपर्क करें
सीने में दर्द, धड़कन बहुत तेज़ या अनियमित लगना, सांस फूलना, बेहोशी, बुखार या जांघ से खून आए तो तुरंत संपर्क करें। इसी तरह की दूसरी प्रोसीजर है PDA डिवाइस क्लोज़र।
आपका छेद डिवाइस से बंद हो सकता है या नहीं, यह जांच और इको की पूरी रिपोर्ट देखकर ही तय होता है। यह जानकारी सिर्फ समझने के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
