दिल में छेद (ASD, PDA, VSD)
दिल में छेद जन्म से चैंबरों या बड़ी नसों के बीच रहा रास्ता है; छोटा छेद अपने आप बंद हो सकता है, बड़े में डिवाइस या सर्जरी लगती है।
छेद से खून का बहाव कैसे बदलता है?
दिल के चार चैंबर होते हैं। दायाँ हिस्सा खून को फेफड़ों में भेजता है और बायाँ हिस्सा ज़्यादा दबाव से उसे पूरे शरीर में पंप करता है। अगर बीच की दीवार में छेद हो, तो बाएँ से खून दाईं ओर रिसने लगता है। इससे फेफड़ों में ज़्यादा खून जाता है और दिल को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। सालों तक ऐसा रहे तो दाएँ हिस्से और फेफड़ों पर दबाव पड़ता है।
तीन प्रकार जिनके बारे में अक्सर सुनते हैं
- ASD: ऊपर के दो चैंबरों के बीच की दीवार में छेद। अक्सर बड़े होने पर ही पता चलता है।
- VSD: नीचे के दो चैंबरों के बीच छेद। छोटे बच्चों में आम है, और कई छोटे VSD अपने आप बंद हो जाते हैं।
- PDA: जन्म से पहले हर बच्चे में एक नस होती है जो जन्म के कुछ समय बाद बंद हो जानी चाहिए, पर खुली रह जाती है। समय से पहले जन्मे बच्चों में यह ज़्यादा होता है।
ऐसा क्यों होता है?
ज़्यादातर छेद जन्म से होते हैं, जब माँ के पेट में दिल बन रहा होता है। समय से पहले जन्म, कुछ जेनेटिक बीमारियाँ, परिवार में दिल की जन्मजात बीमारी, और गर्भावस्था में माँ को रूबेला जैसा इन्फेक्शन या बेकाबू डायबिटीज़ होने से संभावना बढ़ती है। कई बार कोई खास वजह नहीं मिलती।
पता कैसे चलता है?
स्टेथोस्कोप से जाँचते समय डॉक्टर को मरमर नाम की आवाज़ सुनाई दे सकती है। इको से छेद का प्रकार, आकार और दिल पर असर पक्का होता है। ECG और छाती का एक्स-रे भी मदद करते हैं। बड़ों में छेद बंद करने की योजना से पहले खाने की नली से किया जाने वाला इको (TEE) करके नज़दीक से देखा जाता है।
इलाज के विकल्प
छोटा छेद जो दिल पर दबाव नहीं डाल रहा, उसमें अक्सर सिर्फ़ नियमित जाँच होती है। अगर छेद से दिल बड़ा हो रहा हो या फेफड़ों पर दबाव पड़ रहा हो, तो आमतौर पर उसे बंद करने की सलाह दी जाती है। कई ASD और PDA बिना छाती खोले, पैर की नस से डिवाइस ले जाकर बंद किए जा सकते हैं। इसके बारे में ASD डिवाइस क्लोज़र और PDA डिवाइस क्लोज़र पर पढ़ें। कुछ VSD भी डिवाइस से बंद होते हैं, जबकि कुछ में सर्जरी लगती है। यह फैसला छेद के आकार, जगह और किनारों को देखकर होता है।
देर क्यों न करें?
बड़ा छेद सालों तक छोड़ दिया जाए तो फेफड़ों का दबाव बढ़ सकता है (पल्मोनरी हाइपरटेंशन), जिससे बाद में छेद बंद करना सुरक्षित नहीं रहता। बच्चा तेज़ सांस ले रहा हो, नीला पड़ रहा हो या दूध न पी रहा हो, या किसी को बेहोशी या बहुत सांस फूल रही हो, तो तुरंत दिखाएँ।
सही निदान और इलाज डॉक्टर की जाँच के बाद ही तय होता है। यह जानकारी बीमारी को समझने के लिए है।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
