पेरिकार्डियोसेंटेसिस (दिल के आसपास का पानी निकालना)
दिल के चारों ओर की थैली में जमा ज़्यादा पानी इको की मदद से सुई और पतली नली डालकर निकाला जाता है, जिससे दिल पर दबाव कम होता है और वजह भी पता चलती है।
दिल के चारों ओर की थैली
दिल एक पतली, दो परतों वाली थैली के अंदर होता है, जिसे पेरिकार्डियम कहते हैं। दोनों परतों के बीच हमेशा थोड़ा-सा पानी होता है। जब यह ज़्यादा जमा हो जाए तो इसे पेरिकार्डियल इफ्यूज़न कहते हैं। वजहें कई हैं, जैसे इन्फेक्शन (टीबी भी), किडनी फेल्योर, थायरॉइड कम होना, कैंसर, सूजन वाली कुछ बीमारियां, हार्ट ऑपरेशन या हार्ट अटैक के बाद। कभी-कभी कोई वजह नहीं मिलती।
पानी कब निकालना पड़ता है?
पानी थोड़ा हो तो सिर्फ वजह का इलाज और इको से निगरानी काफी हो सकती है। लेकिन इन हालात में निकालना पड़ता है:
- पानी दिल को दबा रहा है और दिल ठीक से भर नहीं पा रहा। इसे टैम्पोनेड कहते हैं और यह इमरजेंसी है। सांस फूलना, तेज़ नब्ज़, कम बीपी, चक्कर या बेहोशी हो सकती है।
- वजह पता करने के लिए पानी की जांच करनी हो।
- पानी बहुत ज़्यादा है और इलाज से भी कम नहीं हो रहा।
कैसे निकाला जाता है
- आपको टेक लगाकर आधा बैठा हुआ लिटाया जाता है। इको पर दिल और पानी देखकर सबसे सुरक्षित जगह चुनी जाती है, आमतौर पर छाती की हड्डी के ठीक नीचे या छाती की दीवार पर।
- वहां लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है। आप होश में रहते हैं।
- इको देखते हुए, कभी एक्स-रे भी, सुई पानी तक ले जाई जाती है। फिर वायर डालकर एक पतली मुलायम नली, यानी ड्रेन, लगाई जाती है।
- पानी निकाला जाता है और जांच के लिए भेजा जाता है। बचा पानी निकलने के लिए ड्रेन कुछ समय लगी रह सकती है।
पहले और बाद में
खून पतला करने की दवा, खून बहने की परेशानी और एलर्जी के बारे में बताएं। इमरजेंसी में यह जानकारी इलाज के साथ-साथ जल्दी ली जाती है। बाद में नब्ज़, बीपी और ड्रेन से निकलने वाले पानी पर नज़र रखी जाती है और इको दोबारा किया जाता है। असली वजह का इलाज बहुत ज़रूरी है, वरना पानी फिर जमा हो सकता है।
तुरंत कब आएं
घर जाने के बाद फिर से सांस फूले, सीने में दर्द हो, चक्कर आए, बुखार आए, या ड्रेन वाली जगह लाल हो या उससे पानी निकले तो तुरंत अस्पताल आएं। इमरजेंसी के लक्षण देखें।
पानी निकालने की ज़रूरत है या नहीं, यह जांच और इको रिपोर्ट देखकर ही तय होता है। यह जानकारी सिर्फ समझने के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती।
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
