हार्ट अटैक के लक्षण दिखें तो पहले घंटे में क्या करें?
सीने में दबाव, पसीना या साँस फूलना — ये हार्ट अटैक हो सकता है। पहले घंटे में एक-एक मिनट क्या करना है, महिलाओं, बुज़ुर्गों और डायबिटीज़ वालों में कौन से लक्षण छूट जाते हैं, और हार्ट अटैक व कार्डियक अरेस्ट में क्या फ़र्क है, यहाँ आसान भाषा में।
"सीने में भारीपन है, पसीना छूट रहा है..." — ऐसा सुनते ही घर में सब घबरा जाते हैं। गैस होगी, थोड़ी देर रुककर देखते हैं — यही पहला ख़याल आता है। लेकिन हार्ट अटैक में यही इंतज़ार भारी पड़ता है। ज़्यादातर बार जब हार्ट अटैक आता है, मरीज़ अकेला नहीं होता। पति, बेटी, साथ काम करने वाला — कोई न कोई पास होता है। अगले एक घंटे में वो क्या करता है, इसका बहुत महत्व है। इसलिए यहाँ सब कुछ आसान रखा गया है, ताकि घबराहट में भी काम आए।
ज़रूरी बातें एक नज़र में
- सीने में दर्द, दबाव, जकड़न या भारीपन; दर्द का हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक जाना; साँस फूलना; ठंडा पसीना; जी मिचलाना या चक्कर — ये हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं।
- शक होते ही एम्बुलेंस के लिए 108 या 112 पर फ़ोन करें। दर्द अपने आप ठीक होगा, इसका इंतज़ार न करें।
- ख़ुद गाड़ी चलाकर अस्पताल न जाएँ।
- मदद आने तक बैठ जाएँ और आराम करें।
- एस्पिरिन तभी चबाएँ जब डॉक्टर या 108 पर बात करने वाले कहें, और आपको उससे एलर्जी न हो।
- ऐसे अस्पताल पहुँचने की कोशिश करें जहाँ इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी होती हो।
- अगर मरीज़ गिर जाए और ठीक से साँस न ले रहा हो, तो ये कार्डियक अरेस्ट है। मदद के लिए आवाज़ लगाएँ और तुरंत हैंड्स-ओनली CPR शुरू करें।
हर मिनट क्यों मायने रखता है?
दिल की मांसपेशी को खून पहुँचाने वाली नसों को कोरोनरी आर्टरी कहते हैं। ज़्यादातर हार्ट अटैक तब होते हैं जब इनमें से किसी नस में अचानक खून का थक्का बनकर उसे बंद कर देता है। जितनी देर नस बंद रहती है, उतनी देर आगे की मांसपेशी को ऑक्सीजन नहीं मिलती। और हर मिनट के साथ नुकसान बढ़ता जाता है।
नस जल्दी खुल जाए तो ये नुकसान कम रखा जा सकता है। इसके लिए इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी की जाती है, और अगर वो समय पर मुमकिन न हो तो थक्का घोलने वाली दवा दी जाती है। इसीलिए "देखते हैं दर्द रुकता है या नहीं" कहकर घर पर बिताया गया समय इतना अहम है।
ये कोई दुर्लभ बीमारी नहीं है। WHO के अनुमान के मुताबिक़ 2022 में दुनिया भर में दिल और खून की नसों की बीमारियों से लगभग 1 करोड़ 98 लाख मौतें हुईं — यानी कुल मौतों का करीब 32%। और इनमें से लगभग 85% मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक से हुईं।
मिनट-दर-मिनट क्या करें?
नीचे दिया समय घड़ी देखकर चलने के लिए नहीं है। बस यह क्रम याद रखें और समय बर्बाद न करें।
- पहला मिनट: लक्षणों को गंभीरता से लें। सीने की तकलीफ़ कुछ मिनट से ज़्यादा रहे, या रुक-रुककर लौटती रहे, और साथ में पसीना, साँस फूलना, जी मिचलाना या चक्कर हो — तो इसे हार्ट अटैक मानकर चलें। पहले घरेलू नुस्ख़े न आज़माएँ।
- 1 से 2 मिनट: 108 या 112 पर फ़ोन करें। साफ़ बोलें — "हार्ट अटैक जैसा लग रहा है।" मरीज़ की उम्र, मुख्य लक्षण, और पूरा पता किसी पहचान वाली जगह के साथ बताएँ। फ़ोन चालू और लाइन ख़ाली रखें, ताकि एम्बुलेंस वाले वापस कॉल कर सकें।
- 2 से 3 मिनट: मरीज़ को बिठाएँ, हिलने न दें। दीवार या तकिये के सहारे आधा बैठना ज़्यादातर लोगों को आरामदेह लगता है। तंग कपड़े ढीले करें। चलना, सीढ़ी चढ़ना या कुछ उठाना — कुछ भी नहीं।
- 3 से 5 मिनट: एस्पिरिन के बारे में पूछें। फ़ोन पर बात करने वाले या अपने डॉक्टर को बताएँ कि मरीज़ कौन सी दवाएँ लेता है। वो कहें और एस्पिरिन से एलर्जी न हो, तभी उसे चबाने को दें। कोई दूसरी पेनकिलर या किसी और की दिल की गोलियाँ न दें।
- 5 से 10 मिनट: निकलने की तैयारी। घर का दरवाज़ा खुला रखें। एम्बुलेंस को रास्ता दिखाने के लिए किसी को मेन रोड पर भेजें। चालू दवाओं की लिस्ट, पुराने ECG, रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी एक थैले में रख लें — लेकिन इसके लिए निकलने में देर न करें।
- रास्ते में: सही अस्पताल चुनें। जहाँ कैथ लैब हो और इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी होती हो, वहाँ बंद नस सीधे खोली जा सकती है। ख़ुद गाड़ी न चलाएँ। एम्बुलेंस न मिले तो किसी और को चलाने दें, मरीज़ शांत बैठा रहे।
- पूरे समय: साँस पर नज़र रखें। अगर मरीज़ अचानक गिर जाए, आवाज़ देने पर जवाब न दे, या ठीक से साँस न ले — तो ये कार्डियक अरेस्ट है। तुरंत हैंड्स-ओनली CPR शुरू करें, जैसा नीचे बताया गया है।
ये सारे स्टेप और फ़ोन नंबर हमारे इमरजेंसी पेज पर एक जगह हैं। ज़रूरत पड़ने से पहले, आज ही इसे फ़ोन में सेव कर लें।
ये लक्षण अक्सर पकड़ में नहीं आते
सीने में दर्द सबसे आम लक्षण है, लेकिन हर बार तेज़ नहीं होता। कुछ लोगों को तो वो ठीक से महसूस भी नहीं होता। इन लोगों में हार्ट अटैक को अक्सर कुछ और समझ लिया जाता है।
- महिलाएँ। महिलाओं को भी सीने में दर्द होता है, लेकिन उनमें साँस फूलना, जी मिचलाना, उल्टी, पीठ या जबड़े में दर्द पुरुषों से ज़्यादा दिखता है। अक्सर इसे एसिडिटी, टेंशन या थकान कहकर टाल दिया जाता है।
- बुज़ुर्ग। ज़्यादा उम्र में सीने में ज़्यादा दर्द नहीं होता। उसकी जगह अचानक साँस फूलना, बहुत कमज़ोरी, उलझन या चक्कर खाकर गिर जाना दिख सकता है।
- डायबिटीज़ वाले। लंबे समय की डायबिटीज़ से दर्द महसूस कराने वाली नसें सुन्न हो सकती हैं। तब हार्ट अटैक में सिर्फ़ साँस फूलना, पसीना, थकान या "कुछ ठीक नहीं लग रहा" जैसा महसूस होता है।
- "गैस" जो गैस जैसी नहीं। पेट के ऊपरी हिस्से या सीने की तकलीफ़ अगर मेहनत करने पर बढ़े, साथ में पसीना आए, या रुके ही नहीं — तो सिर्फ़ एसिडिटी की गोली लेकर घर पर न बैठें।
शक हो तब भी फ़ोन करें। ECG में कुछ ही मिनट लगते हैं और घर बैठकर इंतज़ार करने से कहीं जल्दी जवाब मिल जाता है। कारण, जाँचें और आगे की देखभाल के बारे में हमारे हार्ट अटैक पेज पर और जानकारी है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में फ़र्क
लोग ये दोनों शब्द एक ही मतलब में बोलते हैं, पर ये एक नहीं हैं। और दोनों में फ़र्स्ट एड भी अलग है।
हार्ट अटैक खून के बहाव की समस्या है। कोई नस बंद हो जाती है, दिल के एक हिस्से को खून कम मिलता है, लेकिन दिल धड़कता रहता है। मरीज़ आमतौर पर होश में होता है, बात करता है, बेचैन होता है।
कार्डियक अरेस्ट दिल के इलेक्ट्रिक सिस्टम की समस्या है। दिल अचानक ठीक से पंप करना बंद कर देता है। मरीज़ गिर जाता है, जवाब नहीं देता, ठीक से साँस नहीं लेता — बस बीच-बीच में हाँफने जैसी साँस आ सकती है। हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट की एक वजह हो सकता है।
अगर किसी को कार्डियक अरेस्ट हो:
- ज़ोर से मदद के लिए आवाज़ लगाएँ। 108 या 112 पर फ़ोन करें और फ़ोन स्पीकर पर रखें।
- एक हाथ की हथेली का निचला हिस्सा छाती के बीच में रखें, दूसरा हाथ उसके ऊपर। बाँहें सीधी रखें।
- ज़ोर से और तेज़ी से दबाएँ — एक मिनट में करीब 100 से 120 बार। हर बार दबाने के बाद छाती को पूरा ऊपर आने दें।
- एम्बुलेंस टीम के संभालने तक, या मरीज़ के ठीक से साँस लेने तक रुकें नहीं। पास में AED मशीन हो तो उसे चालू करें और उसकी आवाज़ वाली हिदायतें मानें।
हैंड्स-ओनली CPR एक बार डमी पर प्रैक्टिस कर लें तो ठीक से हो जाता है। घर के हर बड़े सदस्य को एक छोटा CPR कोर्स ज़रूर कर लेना चाहिए।
पहले घंटे के बाद
नस खुलने के बाद की देखभाल उतनी ही ज़रूरी है — दवाएँ समय पर, और BP, शुगर, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में। कैथ लैब में असल में क्या होता है, ये एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी का फ़र्क वाले लेख में पढ़ें। हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ाने वाली मुख्य चीज़ों में से एक है हाई BP — इसके नंबर कैसे पढ़ें और कैसे रिकॉर्ड रखें, ये BP के नंबर समझें लेख में है। इमरजेंसी न हो और जाँच करानी हो, तो अपॉइंटमेंट बुक करें।
घरवालों के आम सवाल
दर्द हल्का है, क्या मैं ख़ुद गाड़ी चलाकर जा सकता हूँ?
नहीं। दर्द हल्का हो तब भी दिल की धड़कन अचानक बिगड़ सकती है और गाड़ी चलाते समय आप बेहोश हो सकते हैं। एम्बुलेंस में रास्ते में ही ECG हो सकता है, इलाज शुरू हो सकता है और अस्पताल को पहले से ख़बर दी जा सकती है। एम्बुलेंस न मिले तो किसी और को गाड़ी चलाने दें।
क्या सीने में दर्द हो तो हर किसी को एस्पिरिन लेनी चाहिए?
नहीं। कई हार्ट अटैक में एस्पिरिन फ़ायदा करती है, लेकिन ये हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है — जैसे जिन्हें इससे एलर्जी हो या खून बहने की कोई समस्या हो। सीने में दर्द की दूसरी वजहें भी होती हैं जिनमें एस्पिरिन काम नहीं आती। डॉक्टर या 108 वाले कहें, तभी लें।
दस मिनट में दर्द ठीक हो गया, फिर भी अस्पताल जाना ज़रूरी है?
हाँ। रुक-रुककर होने वाला दर्द इस बात की शुरुआती चेतावनी हो सकता है कि नस बहुत सिकुड़ गई है या थक्का बन रहा है। उसी दिन ECG और डॉक्टर की जाँच ज़रूरी है, और दर्द दोबारा हो तो तुरंत। अगले हफ़्ते की अपॉइंटमेंट का इंतज़ार न करें।
क्या कम उम्र में हार्ट अटैक हो सकता है?
हाँ। उम्र के साथ ख़तरा बढ़ता है, लेकिन जवान लोगों को भी हार्ट अटैक हो सकता है — ख़ासकर सिगरेट या तंबाकू, डायबिटीज़, हाई BP, ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल हो, या परिवार में किसी को कम उम्र में दिल की बीमारी हुई हो। "अभी उम्र ही क्या है" सोचकर लक्षण न टालें। पहले 108, वजह बाद में।
स्रोत
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
