एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में क्या फ़र्क है?
एंजियोग्राफी से पता चलता है कि दिल की नसें सिकुड़ी हैं या नहीं; एंजियोप्लास्टी उन्हें खोलती है। दोनों कैसे होती हैं, अक्सर एक ही दिन क्यों होती हैं, क्या हर ब्लॉकेज में स्टेंट ज़रूरी है, और डॉक्टर से क्या पूछें — सब एक जगह।
सीधा जवाब: एंजियोग्राफी एक जाँच है, और एंजियोप्लास्टी एक इलाज। एंजियोग्राफी में एक पतली, लचीली नली — कैथेटर — दिल की नसों तक ले जाई जाती है, उसमें डाई डाली जाती है, और X-ray में दिखता है कि कोई नस सिकुड़ी या बंद तो नहीं है। एंजियोप्लास्टी में वैसी ही नली से एक छोटा गुब्बारा (बलून) सिकुड़ी जगह तक ले जाकर उसे खोला जाता है। ज़्यादातर बार वहाँ एक स्टेंट लगाया जाता है — धातु की बारीक जालीदार नली — जो नस को खुला रखती है। एंजियोग्राफी से समस्या पता चलती है; एंजियोप्लास्टी उसका इलाज करती है, अगर आपके लिए वही सही इलाज हो।
दोनों की सीधी तुलना
| आप क्या जानना चाहते हैं | एंजियोग्राफी | एंजियोप्लास्टी |
|---|---|---|
| किसलिए | दिल की नसों को देखने के लिए — वे सिकुड़ी हैं या नहीं, कहाँ और कितनी। | सिकुड़ी या बंद नस को चौड़ा करने के लिए, ताकि उसमें फिर से ठीक से खून बहे। |
| क्या किया जाता है | कलाई (रेडियल) या जांघ (फ़ेमोरल) की नस से कैथेटर दिल तक ले जाते हैं। डाई डालकर X-ray वीडियो रिकॉर्ड करते हैं। | वैसे ही कैथेटर से एक पतला तार ब्लॉकेज के पार ले जाते हैं। गुब्बारा फुलाकर नस खोलते हैं, और आमतौर पर स्टेंट लगाते हैं। स्टेंट हमेशा नस में ही रहता है। |
| बेहोशी / सुन्न करना | कलाई या जांघ पर लोकल एनेस्थीसिया। मरीज़ जागता रहता है; कभी-कभी हल्की नींद की दवा दी जाती है। | एंजियोग्राफी जैसा ही लोकल एनेस्थीसिया। मरीज़ जागता रहता है; ज़रूरत हो तो नींद की हल्की दवा। |
| अस्पताल में आमतौर पर कितना रुकना | अक्सर डे-केयर — सब ठीक रहे तो उसी दिन छुट्टी। ये मरीज़ की हालत और अस्पताल के हिसाब से बदलता है। | पहले से तय एंजियोप्लास्टी के बाद अक्सर अगले दिन। हार्ट अटैक के बाद या मुश्किल प्रोसीजर में आमतौर पर ज़्यादा दिन। आपके कार्डियोलॉजिस्ट बताएँगे। |
| आख़िर में आपको क्या मिलता है | रिपोर्ट और रिकॉर्ड की गई इमेज (CD या डिजिटल), जिसमें हर नस का ब्योरा और आगे की सलाह हो — सिर्फ़ दवाएँ, एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी। | खुली हुई नस, स्टेंट की जानकारी के साथ प्रोसीजर रिपोर्ट, दवाओं की लिस्ट — जिसमें स्टेंट को सुरक्षित रखने वाली खून पतला करने की दवाएँ होती हैं — और फ़ॉलो-अप का प्लान। |
यहाँ दोनों प्रोसीजर कैसे तय और किए जाते हैं, ये कोरोनरी एंजियोग्राफी और कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (PTCA) पेज पर पढ़ें।
दोनों अक्सर एक ही दिन क्यों होती हैं?
हार्ट अटैक में दोनों को अलग करने का समय ही नहीं होता। पहले एंजियोग्राफी से बंद नस ढूँढी जाती है, फिर उसी टेबल पर तुरंत एंजियोप्लास्टी होती है। इसे प्राइमरी एंजियोप्लास्टी कहते हैं। अस्पताल पहुँचने से पहले क्या करना है, ये हार्ट अटैक: पहले घंटे में क्या करें लेख में है।
पहले से तय जाँच में भी कभी-कभी एंजियोग्राफी के तुरंत बाद एंजियोप्लास्टी कर दी जाती है। ऐसा तब होता है जब इमेज में ऐसा ब्लॉकेज दिखे जिसका इलाज ज़रूरी हो और जिसमें स्टेंट लग सके — और जाँच से पहले ही मरीज़ और घरवालों से इस बारे में बात होकर उन्होंने सहमति दे दी हो। इससे दोबारा पंक्चर नहीं करना पड़ता और डाई की दूसरी डोज़ नहीं लगती।
लेकिन कभी-कभी एंजियोग्राफी के बाद रुककर, बाद में फ़ैसला लेना बेहतर होता है। जैसे — कई नसों में या लेफ़्ट मेन नस में ब्लॉकेज हो, जहाँ बायपास भी एक विकल्प हो सकता है; किडनी कमज़ोर हो, जहाँ कुल कितनी डाई लगेगी ये मायने रखता है; या घरवालों को विकल्पों पर सोचने का समय चाहिए। सहमति पत्र पर साइन करने से पहले डॉक्टर से पूछ लें कि उनका प्लान क्या है।
क्या हर ब्लॉकेज में स्टेंट ज़रूरी है?
नहीं। एंजियोग्राफी में बड़ा दिखने वाला हर ब्लॉकेज खून के बहाव को उतना नहीं रोकता कि स्टेंट लगाना पड़े। और स्टेंट अकेला इलाज भी नहीं है।
- FFR (फ़्रैक्शनल फ़्लो रिज़र्व) — ब्लॉकेज के पार एक प्रेशर वायर ले जाकर मापा जाता है कि वो असल में खून का बहाव कितना रोक रहा है। बॉर्डरलाइन ब्लॉकेज में स्टेंट चाहिए या नहीं, ये तय करने में मदद मिलती है।
- IVUS और OCT — नस को अंदर से देखने वाली इमेजिंग तकनीकें। इनसे नस का साइज़ और अंदर जमी परत (प्लाक) का प्रकार दिखता है, सही साइज़ का स्टेंट चुनने और स्टेंट पूरा खुला है या नहीं, ये जाँचने में मदद मिलती है।
- दवाएँ और रोज़ की आदतों में बदलाव — कोलेस्ट्रॉल, BP और एंजाइना की गोलियाँ, सिगरेट-तंबाकू छोड़ना, नियमित चलना-फिरना। स्टेबल एंजाइना वाले कई लोगों के लिए इतना काफ़ी हो सकता है।
- बायपास सर्जरी — कुछ मरीज़ों के लिए ये बेहतर विकल्प हो सकता है, जैसे कई नसों में या लेफ़्ट मेन नस में ब्लॉकेज हो, ख़ासकर डायबिटीज़ के साथ। ऐसे फ़ैसले अक्सर कार्डियक सर्जन के साथ मिलकर लिए जाते हैं।
इन तकनीकों के बारे में और जानकारी हमारे इंट्रावैस्कुलर इमेजिंग — OCT, IVUS और FFR पेज पर है, और असली बीमारी के बारे में कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ और एंजाइना पेज पर। नसें सिकुड़ने की एक बड़ी वजह हाई BP है — आपके नंबरों का मतलब क्या है, ये BP के नंबर समझें लेख में है।
अपने कार्डियोलॉजिस्ट से ये सवाल ज़रूर पूछें
- ये जाँच अभी क्यों ज़रूरी है, और ब्लॉकेज मिला तो आगे क्या होगा?
- कलाई से करेंगे या जांघ से, और क्यों?
- ब्लॉकेज मिला तो एंजियोप्लास्टी उसी समय होगी, या बाद में हम मिलकर तय करेंगे?
- क्या ये ब्लॉकेज सच में खून का बहाव रोक रहा है? क्या FFR या IVUS, OCT जैसी इमेजिंग इस्तेमाल होगी?
- मेरे लिए क्या विकल्प हैं — दवाएँ, स्टेंट या बायपास — और आप यही क्यों सुझा रहे हैं?
- मेरे केस में क्या ख़तरे हैं, ख़ासकर अगर किडनी की बीमारी, डायबिटीज़ हो या पहले डाई से रिएक्शन हुआ हो?
- जाँच से पहले कोई दवा बंद करनी या बदलनी है क्या — जैसे खून पतला करने की या डायबिटीज़ की गोलियाँ?
- स्टेंट के बाद कौन सी दवाएँ और कितने समय तक लेनी हैं? खून पतला करने की दवाएँ डॉक्टर से पूछे बिना कभी बंद न करें।
- काम पर कब लौट सकता हूँ, गाड़ी कब चला सकता हूँ, सफ़र कब कर सकता हूँ? अगली जाँच कब है?
- क्या मुझे इमेज और रिपोर्ट की कॉपी मिलेगी?
अपॉइंटमेंट बुक करके आते समय पुरानी सारी रिपोर्ट और एंजियोग्राफी की CD साथ लाएँ। इससे डॉक्टर तुलना कर पाते हैं और कई बार जाँचें दोबारा कराने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
स्रोत
यह जानकारी सिर्फ़ समझने के लिए है — कौन-सी जाँच या इलाज चाहिए, यह जाँच के बाद ही तय होता है।
